Rath Yatra क्या है? कौन से दिन को मनाई जाती है?

rath yatra

Rath Yatra: इस के बारे काफ़ी लोग जानते होंगे लेकिन बहुत सारे लोगो को नई पता की रथ यात्रा आख़िर क्यों मनाई जाती है? Rath yatra भारत मैं मनाई जाने वाला मैं से सब बड़ा Festival है, ओर बहुत लोकप्रिय भी है बाक़ी Festival से थोड़ा अलग है क्यों की ऐ festival घरों मैं ओर मंदिरो मैं रहकर नई माया जाता इस सब के साथ मिल के रथ के साथ मनाया जाता है।

इस Festival मैं यात्रा निकाली जाती है ओर Festival को ज़ोम ओर जोश से मनाया जाता है, इस पर्व मैं देश के दो शेरों मैं ही रथ यात्रा निकाली जाती है।

हमारे भारत मैं उड़ीसा राज्य मैं जगन्नाथपुरी मैं भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर है ओर इस शर को सिर्फ़ पूरी के नाम से भी लोक प्रिय है, पूरी मैं भगवान जगन्नाथ की हर साल भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है, भारत के चार धामों मैं से एक धाम पूरी को मना गया है, ओर देश की दूसरी रथ यात्रा अहमदाबाद मैं निकली जाती है लेकिन पूरी की रथ यात्रा ज़्यादा प्रसिध ओर लोक प्रिय है।

रथ यात्रा क्या है?

Rath yatra एक हमारे भारत मैं मनाए जाने वालों मैं से एक पर्व है , जिसको मुख्य देश के दो शेरों मैं माया जाता है ओर रथ यात्रा निकली जाती है, ऐ पर्व दूसरे festival से अलग है क्यों की ऐ festival अपने घरों मैं ओर मंदिरो मैं नई मनाया जाता इस बाहर पूरे शहर मैं रथ यात्रा को घुमाया जाता है ओर इस festival 10 दिन तक चलता है।

भारत के उड़ीसा राज्य के पूरी शहेर मैं सब से बड़ी रथ यात्रा निकाली जाती है ओर पूरे शहर मैं रथ यात्रा को घुमाया जाता है, शहर के लोग मुख्य तो भगवान जगन्नाथ को अपना भगवान मानते है ओर उसकी की पूजा अर्चना करते है, कहते है की भगवान जगन्नाथ ने अपनी लिया इसी शहेर मैं की थी, रथ यात्रा पर्व बढ़ी धूम धाम से माया जाता है ओर इसको देखने के लिए देश विश से लोग आते है दर्शन करने के लिए

Rath yatra क्यों मनाई जाती है?

रथ यात्रा का पर्व माना ने के पीछे कूच मान्यता हो है ओर इस पर्व को हर वर्ष माया जाता है, इसको मनाने का मुख्य कारण ऐ है की भगवान जगन्नाथ की बहेंन सुभद्रा ने द्वारका दर्शन की इछा व्यक्त की इस लिए भगवान जगन्नाथ ने अपनी बहेंन को रथ मैं बिठा कर पूरे शहर मैं घुमाया तब से हर साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाल ते है।

रथ यात्रा के लिए तीन रथ तैयार किए जाते है जिस मैं सब से पेहला रथ भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का होता है जिस मैं 14 पहिए होते है ओर दूसरा रथ भगवान जगन्नाथ का होता है मतलब श्री कृष्ण का होता है जिस मैं 16 पहिए होते है, ओर आख़िर मैं सुभद्रा का रथ होता है जिस मैं कुल 14 पहिये होते है, तिनो रथ को उनकी लम्बाई रंग ओर उसके पहिए से पहचाना जाता है।

रथ यात्रा पीछे की कहानी क्या है?

रथ यात्रा के पीछे की कहानी ऐ है की भगवान जगन्नाथ का जन्म पूर्णिमा के दिन हुवा था, उस दिन भगवान जगन्नाथ उनके बड़े भाई बलराम ओर बहेंन सुभद्रा अपने रत्नसिहास से उतार कर फिर मंदिर के पास एक मंडप के पास लाया जाता है, फिर भगवान को 108 कलशो से नहलाया जाता है जिसके कारण भगवान बीमार पड जाते है ओर फिर उसे एक घर मैं रखा जाता है उसे ओसर घर कहते है।

फिर 15 दिन बाद भगवान जगन्नाथ ठीक होजाते है, फिर भक्तों को दर्शन देने के लिए बाहर आते है, उसके बाद आषाढ शुल्क की द्वीतिया को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम ओर बहन सुभद्रा के साथ रथ मैं सवार होकर पूरे नगर ओर शहेर मैं भ्रमण करते है।

पूरी मैं जो मंदिर है है लगभग 800 वर्ष पुराना है, ओर ऐ मंदिर चार पवित्र धामों मैं से एक गिना जाता है कहा जाता है की जिन भक्तों को रथ यात्रा मैं रथ खिचने का अवसर मिले ओ व्यक्ति बड़ा भाग्यशाली माना जाता है ओर प्राचीन मान्यता के अनुसार उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

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दोस्तों, मैं आशा कर्ता हु के आपको मेरी ऐ पोस्ट Rath Yatra क्या है ओर क्यू मानते है आपको सब कूच पता चल गया होगा अब मेरी हमेशा से ऐसी कोशिश रहती है के मेरे पोस्ट को पढ़ने वाले सभी दोस्तों को पूरी जानकारी दे पाऊँ ओर कही दूसरी site ओर blog पे जाने की ज़रूरत ना पड़े, अगर आपको ऐ पोस्ट अछी लगी हो तो आप अपने सोशल मीडिया जैसे के Facbook, Instagram ओर WhatsApp पे share करना ना भूले ओर कूच भी प्रश्न हो तो नीचे मज़े commnet box मैं लिख के बताए।

2 COMMENTS

  1. आपके द्वारा लिखे हुए सभी पोस्ट बहुत ही काम के और हेल्पफुल होते है और आपके लेख को पढ़कर समझना भी बहुत आसान होता है. में अक्सर आपके ब्लॉग को बढ़ता हूँ और आपके द्वारा लिखा हुआ पोस्ट मेरी समझ में आसानी से आता है जिसे में अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करता हु. और में ऐसी आशा करता हु की आप इसी तरह से हमें अपना ज्ञान देते रहेंगे.

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